Monday, June 06, 2005

सुन मेरे मौला

मेरे मौला, मेरा रहनुमा बन तू मेरे साथ में चल
अपने कल का भरोसा नही मुझको
कम से कम आज तो तू मेरे साथ में चल।

धर्म के नाम पर आदमी ने दिये तुझको नाम कई
बनाया मंदिर, कहीं मस्‍जिद और बनाये चर्च कहीं।
तू सिर्फ एक है, इस बात को तो ये लोग भूल गये
इनको ये एहसास दिलाने तू मेरे साथ में चल।

कहीं मस्‍जिद को तोड़ा, तो कभी मंदिर जलाये
आदमी ने आदमी से ये सभी काम कराये।
अपने कर्मो का इन्‍हे आज भी नही कोई अफसोस
इनको ये एहसास दिलाने तू मेरे साथ में चल।

पहले दंगे कराये, फिर कई मासूम जलाये
मेरे मौला तूने ये कैसे इन्‍सान बनाये।
अपने कर्मो से ये कहीं हैवान न बन जायें
इनको इक नयी राह दिखाने तू मेरे साथ में चल।

'तरूण' देखा नही जाता, धर्म के नाम पर ये सब
इंसॉ के अदंर का भस्‍मासूर न जग जाये कहीं अब।
इससे पहले कि ये आये, और मिटाये तूझी को
इनके दिलों से खुद को मिटाने तू मेरे साथ में चल।

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