Civilization के बुखार से किसी तरह निजात पायी तो अब सोच रहा हूँ कि कुछ निठल्ला चिन्तन कर लिया जाय॥ सबसे पहले layout change....कडि़यॉ तो पहले ही जोड़ ली हैं॥
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निठल्ला चिन्तन एक आक्रौश है विचारौं की आंधी का, एक द्वंद है सच और झूठ का, एक भावना है प्यार की, एक तमन्ना है आकाश छूने की, कुछ कहने की और कुछ अनकही छोड़ देने की॥
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